कोल्हान के आदिवासियों के हितों में कानूनी पृष्ठभूमि

ब्रिटिश कौंसिल के सदस्य की हैसियत से कौंसिल के गवर्नर जेनरल ने बंगाल रेगुलेशन १३ सन १८३३ पारित किया, इसीलिए यह रेगुलेशन ब्रिटिश कौंसिल का रेगुलेशन हुआ। इसी रेगुलेशन के अनुसार विलकिंसन रुल बना तथा मानकी मुंडा व्यवस्था को कानूनी मान्यता मिला।
डभर कमीशन सन १९६१, जिसकी नियुक्ति संविधान के आर्टिकल ३३९ के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा हुई थी, उस रिपोर्ट के पृष्ट २२ पर इस प्रकार लिखा हुआ है की "भारत के अन्य भागों से आये हिन्दू, मुस्लमान, तथा सिख जो छोटानागपुर के राजा तथा अन्य जमींदारों के पास नौकरी करने आये थे, उनको आदिवासियों की जमीनों की बंदोबस्ती होने लगी, इसी से नाराज होकर सन १८३१-३२ को महान कोल विद्रोह हुआ। आदिवासी कृषकों से मनमानी मालगुजारी लेना, उनसे जबरदस्ती बेगारी करना, तथा खूँट कट्टी जमीनों से उन्हें जबरदस्ती बेदखल करना अन्य प्रकार के शोषण थे। विद्रोह को दबाने के लिए भूमि से सम्बंधित अनेक सुधर लाये गए, ताकि आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों के हाथ न चली जाये। बहुत ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार बंगाल रेगुलेशन १३ सन १८३३ था, जिसके कारण कोल्हान को नॉन रेगुलेटेड इलाका घोषित किया गया था। इन सुधारों तथा प्रशासनिक कार्यवाहियां हालाँकि कम या अधिक रूप में कागजों में ही रह गए, क्योंकि आदिवासियों को इसके बारे बिलकुल भी जानने नहीं दिया गया और अगर जन भी गए तो वे इस तरह विखरे हुए थे की इसका लाभ नहीं उठा सके।
भारत में आजादी के संग्राम की शुरुआत होने पर ब्रिटिश प्रशासकों ने आदिवासियों को राजनितिक छुआ छूत से पृथक रखने का सोचा तथा साइमन कमीशन १९२८ में यही सुझाव दिया गया था की आदिवासियों के लिए केंद्रीय सरकार पर जवाबदेही होनी चाहिए। इन्ही सुधारों के आधार पर भारत अधिनियम १९३५ द्वारा भारत को प्रशासन के लिए तीन हिस्सों में बांटा गया। (क) सामान्य क्षेत्र (ख) निषेद क्षेत्र (ग) अर्ध निषेद क्षेत्र। उक्त एक्ट की धरा ९१ तथा ९२ के अनुसार राज्यपाल को अधिकार दिया गया था, की केंद्रीय तथा प्रन्तिये सरकार का कोई भी कानून बिना उनके निर्देशन, उपवाद एवं उपांतरण के जैसा उचित समझे, निषेद तथा अर्ध निषेद क्षेत्र में लागू नहीं होगा। साथ ही राज्यपाल को उक्त क्षेत्र में शांति एवं सुशासन रखने के लिए रेगुलेशन बनाने का अधिकार था।
आजादी के बाद भारतीय संविधान द्वारा भारत को प्रशासन के लिए दो हिस्सों में बांटा गया (क) सामान्य क्षेत्र (ख) अनुसूचित क्षेत्र। अनुसूचित क्षेत्र पुन: दो भागों में बांटा (क) पहले का निषेद क्षेत्र जो आज ६वे अनुसूची में रखन गया, जिसे आदिवासी क्षेत्र कहा गया (ख) पहले का अर्ध निषेद क्षेत्र जो ५वे अनुसूची में रखा गया, जिसे अनुसूचित क्षेत्र कहा गया। संविधान के आर्टिकल २४४ द्वारा ५वे तथा ६वे अनुसूची में दी गयी व्यवस्थाओं के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र तथा आदिवासी क्षेत्र का प्रशासन चलना था पर कुछ ऐसे तथ्यों को देखने से लगता है की उन व्यवस्थाओं के अनुसार चल नहीं रहा है.

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