पौणि (हो समाज के देवी देवता)

तीसरा स्थान पौणि देवता (बुरु बोंगा) का होता है। जो आदिकाल से जंगलों, पहाड़ों में बसने वाले मानुषों की रक्षा करता है। इनके उपासना करने के पश्चात ही हम किसी जंगली पशु पक्षियों को घर में पालने लायक (पालतू) बनाते हैं एवं सुख सम्रीदी के लिए साल में एक बार पूजा अर्चना करते है। ऐसा मानना है की हमने जंगली जीव-जंतुओं को पालतू बनाने के पहले कुछ शर्तें व प्रण लिया था। जब जयरा रूपी शक्ति देशाउली के साथ होती है तब या सृष्टि का काम करती है यानि माता का रूप ले लेती है और जब माँ रूपी ऋणात्मक शक्ति पौणि के साथ होती है तब यह पालनकर्ता का काम करती है। पौणि जंगल में एवं पानी में होते हैं। यह अपने मारक क्षमता के कारण मानव समुदाय इसका अहसास जल्दी कर सकता है।

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