हो समाज का ब्राह्मनिकरण

आज आदिवासी हो समाज के लोग जगह जगह अपने-अपने गाँव में दुर्गा पूजा मनाने लगे हैं, जबकि यह त्यौहार आदिवासी हो समाज का त्यौहार है ही नहीं. वास्तव में दुर्गा पूजा को गावों में गोप, तांती या अन्य गैर आदिवासी समूह ने लाया. जिसमे आरएसएस की भूमिका महत्वपूर्ण है. आदिवासी हो समाज की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं धार्मिक विरासत को आज हिन्दुओं के संस्कृति, समाज एवं धर्म ने बहुत ज्यादा अपने प्रभाव में ला दिया है. इसके कारणों पर मंथन समय रहते करना होगा. कुछ इतिहासिक घटनाक्रम हैं जिस पर मैं लोगों का ध्यान आकृष्ट कर रहा हूँ.राम, रावण, ईशा, शिव, दुर्गा, काली आदि थे या नहीं इसका तो पता नहीं लेकिन विज्ञान ने इनके अस्तित्व को पूरी तरह नकार दिया है. मूर्ति पूजा की शुरुआत ईशा के जन्म से ९३ साल बाद हुई. इसकी शुरुआत तब हुई जब गौतम बुध के अनुयाइयों ने उनके आदर्शों को मानने के लिए जगह जगह उनकी मूर्ति बनाकर उनकी उपासना करने लगे. ऐसा लगता था मानो पूरी दुनिया उनके पीछे जा रही हो. उस परिस्तिथि में ब्राह्मण जात के लोगों ने अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए एक विचार किया की क्यों न हम भी अपने देवी देवताओं का मूर्ति बनाकर लोगों को बुध की तरफ जाने से रोकें. उसी समय से आर्य यानि ब्राह्मणों ने मूर्ति बनाकर पूजा पाट शुरू किया. लेकिन आज चाहे मीडिया हो या अन्य प्रचार प्रसार के माध्यम टीवी, सिनेमा आदि के द्वारा वे लोग अपने मंदिरों एवं देवी देवताओं को ही लोगों तक पहुँचाने का काम कर रहे है. और शिकार आदिवासी जैसे लोग ज्यादा हो रहे हैं. कई बातें सोचनिए है की विज्ञान युग की शुरुआत १८१४-१९ में हुई है, उस समय कैमरे भी नहीं थे लेकिन करोड़ों वर्ष पहले के देवी देवताओं के चिकने चेहरे आज हमारे सामने मौजूद कर दिए गए हैं. कई तरह के सोच करोड़ों वर्ष पहले की बात कह कर धर्म में अंधे लोगों के बीच बांटी जा रही है और इस धर्म रूपी व्यवसाय के ग्राहक बनते जा रहे हैं. गणेश की पूजा तो १९०५ में शुरू हुई. ऐसी ऐसी कहानियां एवं ग्रन्थ गढ़े गए हैं की आज उसके पीछे ब्राह्मण अपनी दुकान चलाने में व्यस्त हो गया है. और उस भगवान की खोज में आधी दुनिया मानो पागल हो गई हो. आदिवासियों की संस्कृति, समाज एवं धर्म दस्तूर पृथ्वी के उत्पति के समय से चला आ रहा है,और आदिवासी अपनी अटूट आस्था को प्रकृति के कण कण में स्थापित करता है. लेकिन आज दो पैर, दो हाथ वाले यानि मानव स्वरुप तथाकथित भगवानों को इस श्रृष्टि का सबसे शक्तिशाली मानने की भूल ने इस पृथ्वी को ही नरक बना दिया है. सोचने वाली बात है की मंदिरों में दर्शन के लिए जाते समय लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं, ईशा के साम्राज्य में चक्रवात से जीवन लीला समाप्त हो रही है, लेकिन आदिवासी कभी भी इन प्राकृतिक आपदा के शिकार नहीं होते, क्यों? भारत ही ऐसा देश है जहाँ शिक्षा की देवी सरस्वती निवास करती है, और ४६% लोग अनपढ़ हैं, भारत ही ऐसा देश है जहाँ धन की देवी लक्ष्मी निवास करती है पर ४० करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीने पर मजबूर हैं. भारत ही ऐसा देश है जहाँ शक्ति की देवी दुर्गा निवास करती है पर ३०%लोग कुपोषण के शिकार हैं, फिर किस बात का सरस्वती, और किस बात का लक्ष्मी और किस बात का दुर्गा ? अमेरिका, इंग्लैंड में तो ये देवी नहीं होते फिर भी वे लोग जी रहे हैं....

Comments