झारखण्ड की राजधानी क्षेत्र में आदिवासियों की स्थिति दयनीय ...

कुटी गाँव में रात्रि विश्राम के बाद पदयात्री चौका होते हुए राष्ट्रिय राजमार्ग में अवस्थित राडगाँव से 3 km अन्दर कुवासाल गाँव में पहुंचे। रास्ते में माझी बाबा लोगों ने नगाड़ा और मांदल से पदयात्रियों का स्वागत किया। भूमिज आदिवासी किसान समिति की ओर से भी पदयात्रियों का स्वागत किया गया। कुवासाल में बाजार में जनसभा का आयोजन किया गया था। रांची जिला अंतर्गत रांची से 48 km दूर इस जगह में एक डैम है सुरंगी डैम। इसमें बुरु हतु, डिमनिया, कुद्दा हतु, कोदोम कोचा, मुकरुम दीह, बुदायेन कोचा, निमडीह, आदि गाँव डूब गए हैं और वहां के आदिवासियों को न तो मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास। वे लोग दर दर भटक रहे हैं। कोई गाड़ी जब क्षेत्र में जंगल में घुसती है तो लोग एक उम्मीद से दौड़ कर आते हैं। पर उन्हें किसी पर भी भरोसा नहीं है। यहाँ तक की हमलोगों के सदस्यों पर भी पहली बार उन्हें ठगने वाले लोग ही लगे। बाद में हो एवं मुंडारी में बात करने पर वे साथ आए। यह जगह मुंडा जातियों का है। सरकार क्या होती है, सरकारी पदाधिकारी क्या चीज है, कुछ भी जानकारी उन्हें नहीं है। पूरी तरह वहां की सभ्यता और संस्कृति को तबाह कर दिया गया है। महुआ, और अन्य जंगल के उत्पाद नमक से बदली कर व्यापारी लूट के ले जाते हैं। पदयात्रियों ने जब उन्हें पांचवी अनुसूची, एवं अन्य कानून की जानकारी दिए तो वे लोग कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दिए। आज रात पदयात्री कुवासाल गाँव में ही रात्रि विश्राम करेंगे।

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